Search
  • deepak9451360382

Guru pornima

आषाढ़ में ही क्‍यों पड़ती है गुरु पूर्णिमा?

गुरु के ब‍िना न तो जीवन की सार्थकता है और न ही ज्ञान प्राप्ति संभव है। ज‍िस तरह हमारी प्रथम गुरु मां हमें जीवन देती हैं और सांसर‍िक मूल्‍यों से हमारा पर‍िचय कराती हैं। ठीक उसी तरह ज्ञान और भगवान की प्राप्ति का मार्ग केवल एक गुरु ही द‍िखा सकता है। यानी क‍ि गुरु के ब‍िना कुछ भी संभव नहीं है। शायद यही वजह रही होगी क‍ि गुरु पूजा की शुरुआत की गई।

शास्‍त्रों में बताई गयी है गुरु की मह‍िमा

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार और रु का का अर्थ- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाता है। प्राचीन काल में शिष्य जब गुरु के आश्रम में नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन पूर्ण श्रद्धा से अपने गुरु की पूजा का आयोजन करते थे।

इन्‍हें मानते हैं संपूर्ण मानव जाति का गुरु

सनातन संस्कृति में गुरु देवता के तुल्य माना गया है। गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले वेद व्यासजी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ई. पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन व्यास जी ने शिष्यों एवं मुनियों को सर्वप्रथम श्री भागवतपुराण का ज्ञान दिया था। अत: यह शुभ दिन व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

शुरू की गुरु पूजा की परंपरा

इसी दिन वेदव्यास के अनेक शिष्यों में से पांच शिष्यों ने गुरु पूजा की परंपरा प्रारंभ की। पुष्पमंडप में उच्चासन पर गुरु यानी व्यास जी को बिठाकर पुष्प मालाएं अर्पित कीं, आरती की तथा अपने ग्रंथ अर्पित किए थे। जिस कारण प्रत्येक वर्ष इस दिन लोग व्यास जी के चित्र का पूजन और उनके द्वारा रचित ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। कई मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्मलीन संतों की मूर्ति या समाधि की पूजा करते हैं।

आषाढ़ में गुरु पूर्णिमा मनाने का जानें कारण

भारत वर्ष में सभी ऋतुओं का अपना ही महत्व है। गुरु पूर्णिमा खास तौर पर वर्षा ऋतु में मनाने के पीछे भी एक कारण है। क्योंकि इन चार माह में न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी होती है। यह समय अध्ययन और अध्यापन के लिए अनुकूल व सर्वश्रेष्ठ है। इसलिए गुरु चरण में उपस्थित शिष्य ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति को प्राप्त करने हेतु इस समय का चयन करते हैं। वैसे तो हर दिन गुरु की सेवा करनी चाहिए लेकिन इस दिन हर शिष्य को अपने गुरु की पूजा कर अपने जीवन को सार्थक करना चाहिए।

इस एक पूर्णिमा की पूजा से म‍िल जाता है सभी का लाभ

वर्ष की अन्य सभी पूर्णिमाओं में इस पूर्णिमा का महत्व सबसे ज्यादा है। इस पूर्णिमा को इतनी श्रेष्ठता प्राप्त है कि इस एकमात्र पूर्णिमा का पालन करने से ही वर्ष भर की पूर्णिमाओं का फल प्राप्त होता है। गुरु पूर्णिमा एक ऐसा पर्व है, जिसमें हम अपने गुरुजनों, महापुरुषों, माता-पिता एवं श्रेष्ठजनों के लिए कृतज्ञता और आभार व्यक्त करते हैं।pt. Deepak Pandey kanpur

www.vaastuinkanpur. com9305360382

0 views0 comments

Recent Posts

See All

Office and work spaces are the place where wealth is generated and places where people are supposed to be at their productive best. Flow of energy and sanctity within the work space or office is there

Vastu Shastra for kitchen is recommended in the south-east corner. Since in this region, the vitaminised sun rays enter from the east and the air from the south since the earth revolves around the sun