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सेवा में

संपादक जी

विषय:पूजन वंदन और नवरात्रि आरती शुभ मुहूर्त

महोदय. नवरात्र के पहले दिन से ही देवी मंदिरों में श्रंगार शुरू हो जाएंगे मां आकर्षण प्रधानों और फूलों की बीच सजी हुई नजर आएंगी मंदिरों में इस तरह से कुछ खास इंतजाम किए जा रहे हैं सोशल डिस्टेंसिंग के द्वारा कि रात में देवी मंदिर रोशनी से जगमगा उठे भक्त भी मां के दर्शन के लिए लालायित हैं भोर से ही देवी मंदिरों में माता के जयकारे गूंजने लगेंगे भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिरों की ओर से व्यवस्था परिवर्तन भी किया गया है खुलने व बंद होने के समय सरकार व राज्य सरकार के द्वारा निर्धारित पर तय कर दिए गए हैं संपूर्ण भारत में प्रशासनिक आदेशों देवी मां के मंदिरों पर भक्तों के दर्शन के लिए व्यवस्थाएं की जा रही है उक्त जानकारी कानपुर के पंडित दीपक पांडे ने दी नवरात्र 7/10/2021 से प्रारंभ हो रहे हैं जिसमें से कलश स्थापना का समय प्रातः काल 4:11 से 5:43 तक तत्पश्चात 9:18 से 10:17 तक तत्पश्चात 11:32 से 12:28 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है नवरात्र में कलश पूजन का विशेष महत्व होता है और यह भी मानता है कि बगैर कलश पूजन के नवरात्र में पूजन पूर्ण नहीं होता है पूजन के दौरान कलश स्थापना का स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है यदि इसके स्थान पर परिवर्तन हो जाता है तो नवरात्र पूजन का फल निम्न प्राप्त होता है ऐसी में आप अपने परिवार की सुविधा के अनुसार कलश स्थापना करें और परिस्थितियों में परिवार को थोड़ी सी सावधानी से कलश स्थापना का पूर्ण फल मिल सकता है नवरात्र के पूजन के लिए स्थापित होने वाले पूजा कलश को मंदिर या मंदिर के उत्तर-पूर्व पर स्थापित करें कलर्स को स्थापित करती यह भी ध्यान दें कि पूजन करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए इस तरह के स्थान पर पूजन करने से आपको और आपके परिवार को पूर्ण लाभ प्राप्त होगा

भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को कलश के रूप में अक्षय पात्र दिया था भगवान राम ने रामेश्वरम की स्थापना से पूर्व कलश स्थापित किया था सूर्य के कोणार्क सूर्य मंदिर में स्थापित कलश में चुंबकीय शक्ति मानी जाती है समुद्र मंथन में मां लक्ष्मी जी ने कलर्स से निकले अमृत को ही वितरित किया था वेदों में कलश को ही ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है शास्त्रों में कलश को ही पृथ्वी का स्वरूप माना गया है आपका पंडित दीपक पांडे 9305360382


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